Wednesday, March 7, 2012

Palmistry - Love Lines

Palmistry - Love Lines

Palmistry Love Line

Sunday, January 22, 2012


दूध का दूध पानी का पानी


milk
source: getty images
फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की हाल में आई रिपोर्ट ने लोगों के कान खड़े कर दिए। लोग सोचने को मजबूर हैं कि जब देश भर में लिए गए 1791 सैंपलों की जांच में 68.4 फीसदी दूध मिलावटी पकड़ा गया है तो हमारे घरों में आने वाला दूध आखिर कितना प्योर और सेफ है। नामी दूध डेरियां भी मानती हैं कि दूध में खतरनाक केमिकल की मिलावट का खेल चल रहा है , लेकिन वे यह दावा भी करती हैं कि उनका दूध प्योर और सेफ है। दूध की सेफ्टी और प्योरिटी से जुड़े तमाम पहलुओं को विस्तार से बता रहे हैं रुनीत शर्मा: 

आमतौर पर दूध में 85 फीसदी पानी होता है और बाकी हिस्से में ठोस तत्व यानी मिनरल्स व फैट होता है। बाजार में गाय-भैंस के अलावा विभिन्न कंपनियों का पैकेट वाला दूध मिलता है। दूध प्रोटीन , कैल्शियम और राइबोफ्लेविन (विटामिन बी-2) युक्त तो होता ही है , इसमें विटामिन ए ,डी , के और ई समेत फॉस्फोरस , मैग्नीशियम , आयोडीन समेत कई मिनरल और फैट तथा एनर्जी भी होती है। इसके अलावा इसमें कई एंजाइम और लिविंग ब्लड सेल्स भी मिलते हैं। डाइटिशियंस की मानें तो ये सब पोषक तत्व हमारी मांसपेशियों और हड्डियों के गठन में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रोटीन ऐंटिबॉडीज के रूप में काम करता है और हमें इन्फेक्शन से बचाता है।

गाय का दूध: गाय के दूध में प्रति ग्राम 3.14 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। गाय के ताजा दूध को ही सबसे अच्छा माना जाता है , वैसे कुछ स्टडी बताती हैं कि गाय के दूध से बेहतर है भैंस का दूध। उसमें कम कोलेस्ट्रॉल होता है और मिनरल ज्यादा होते हैं।

भैंस का दूध: भैंस के दूध में प्रति ग्राम 0.65 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। भैंस के दूध में गाय के दूध की तुलना में 92 फीसदी कैल्शियम , 37 फीसदी आयरन और 118 फीसदी फॉस्फोरस ज्यादा होता है।

पैकेट वाला दूध: इस तरह का दूध मदर डेरी , अमूल , पराग जैसी कंपनियां सप्लाई करती हैं। इसमें विटामिन ए, आयरन और कैल्शियम ऊपर से भी मिलाया जाता है। इसमें भी कई तरह के जैसे फुल क्रीम , टोंड , डबल टोंड और फ्लेवर्ड मिल्क मिलते हैं। फुल क्रीम में फैट सबसे अधिक होता है। इन सभी की अपनी उपयोगिता है , पर डॉक्टरों की राय है कि बच्चों के लिए फुल क्रीम दूध बेहतर है तो बड़ों के लिए कम फैट वाला दूध।

इनके अलावा बकरी का दूध , ऊंटनी का दूध , फ्लेवर्ड मिल्क और सोयाबीन का भी दूध होता है।

मदर डेरी के दूध में फैट और एसएनएफ की मात्रा सभी आंकड़े प्रतिशत में 
दूध की क्वॉलिटी
एसएनएफ
फैट
खुला दूध
8.5
3
फुल क्रीम
9
6
टोंड पैकेट
8.5
3
डबल टोंड
9
1.5
स्किम्ड
8.5
0.5 से कम
स्टैंडर्डाइज्ड
8.5
4.5










*फैट यानी क्रीम और बटर

*एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) यानी दूध में मौजूद लेक्टोज , प्रोटीन , कैल्शियम और मिनरल्स जैसे तत्व।

मिलावट जानने के लिए टेस्ट 
1. यूरिया: दो मिलीलीटर दूध लें। उसमें 2 मिलीलीटर यूरिया परीक्षण रसायन ( urea reagent ) डालें और दोनों को अच्छी तरह मिलाएं। पीला रंग दिखाई पड़े तो दूध में यूरिया मिलाया गया है।

2. अमोनिया: 1 मिलीलीटर दूध लें और उसमें 2 मिलीलीटर अमोनिया परीक्षण रसायन ( ammonia regent) अच्छी तरह मिलाएं। रंग भूरा हो जाए तो समझिए दूध में अमोनिया फर्टिलाइजर मिलाया गया है।

3. नाइट्रेट फर्टिलाइजर: 1 मिलीलीटर दूध लें और ट्यूब के किनारे से 1 मिलीलीटर नाइट्रेट परीक्षण रसायन (nitrate regent ) डालें। दूध और नाइट्रेट के मिलने की जगह अगर नीला घेरा बन जाए तो नाइट्रेट फर्टिलाइजर या तालाब का पानी मिलाया गया है।

4. स्टार्च: 5 मिलीलीटर दूध उबालें। ठंडा होने पर इसमें स्टार्च परीक्षण रसायन ( starch regent ) की कुछ बूंदें मिला दें। नीला रंग होने पर समझें कि दूध में स्टार्च मिलाया गया है।

5. चीनी: 1 मिलीलीटर दूध लें। उसमें 1 मिलीलीटर चीनी परीक्षण रसायन ( sugar regent ) मिलाएं और तीन से पांच मिनट तक उबलते पानी में रखें। लाल रंग होने पर समझें कि चीनी की मिलावट है।

6. ग्लूकोज : 1 मिलीलीटर दूध लें और उसमें 1 मिलीलीटर ग्लूकोज परीक्षण रसायन-1( glucose regent -1 ) मिलाएं। तीन मिनट तक इसे उबलते पानी में रहने दें और ठंडा होने पर 1 मिलीलीटर ग्लूकोज परीक्षण रसायन-2 ( glucose regent -2) मिलाएं। गहरा नीला रंग होने पर जान लें कि दूध में ग्लूकोज मिलाया गया है।

7. नमक: 5 मिलीलीटर नमक परीक्षण रसायन-1 ( salt regent -1) लें और उसमें नमक परीक्षण रसायन-2 (salt regent -2) की कुछ बूंदें मिला दें। लाल रंग उभरकर आएगा। उसमें 1 मिलीलीटर दूध डालकर अच्छी तरह मिलाएं। पीला रंग होने पर समझिए कि दूध में नमक मिलाया गया है।

8. न्यूट्रलाइजर्स: 5 मिलीलीटर दूध लें। उसमें 5 मिलीलीटर न्यूट्रलाइजर्स परीक्षण रसायन-1 ( nurtalizers regent -1) और न्यूट्रलाइजर्स परीक्षण रसायन-2 ( nurtalizers regent -2) की कुछ बूंदें मिलाएं और अच्छी तरह घोलें। गुलाबी रंग होनेपर समझें कि न्यूट्रलाइजर मिलाया गया है।

9. हाइड्रोजन परॉक्साइड: 1 मिलीलीटर दूध लें। हाइड्रोजन परॉक्साइड परीक्षण रसायन ( hydrogen peroxide reagent ) की कुछ बूंदें डालकर अच्छी तरह मिलाएं। गुलाबी या लाल रंग होने पर समझिए कि दूध में हाइड्रोजन परॉक्साइड मिलाया गया है।

10. फॉर्मेलिन: 10 मिलीलीटर दूध लें और ट्यूब के किनारे को छूता हुआ 5 मिलीलीटर फॉर्मेलिन परीक्षण रसायन ( formalin reagent ) डालें। बीच में गहरे जामुनी रंग का घेरा बनने पर समझें कि फॉर्मेलिन मिलाया गया है।

क्यों की जाती है मिलावट 
यूरिया , अमोनिया , नाइट्रेट फर्टिलाइजर , स्टार्च , शुगर , ग्लूकोज और नमक की मिलावट करने दूध की मात्रा तो बढ़ती ही है , साथ ही उसमें एसएनएफ और फैट भी बढ़ जाता है। न्यूट्रलाइजर इसलिए मिलाया जाता है कि दूध में खटास पैदा न हो। हाइड्रोजन परॉक्साइड और फॉर्मेलिन मिलाने के पीछे वजह यह है कि दूध जल्दी खराब न हो। आटा या स्टार्च मिलाने से यूरिया और आमेनिया की वजह से खराब हुआ टेस्ट ठीक कर देता है शुगर से मिठास आती है।

मिलावट से खतरे 
दूध में हाइड्रोजन परॉक्साइड , यूरिया , अमोनिया , नाइट्रेट फर्टिलाइजर , न्यूट्रलाइजर , फॉर्मेलिन आदि की मिलावट से शरीर के अंदरूनी हिस्से मसलन आंतें , किडनी , लिवर आदि प्रभावित हो सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे खतरनाक केमिकल वाले दूध को पीने से शरीर के तमाम अंगों में गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। जहां तक मिलावटी दूध पकड़ने का सवाल है तो सबसे बढ़िया किट तो आपकी जबान ही है। मिलावटी दूध होगा तो आपको उबकाई सी महसूस होगी। मिलावटी दूध की चाय बनाएंगे , तो वह फट जाएगी। ऐसे दूध से मक्खन और घी नहीं निकलेगा।

टेस्टिंग का सही तरीका 
केमिकल की सही मात्रा के लिए बोतल का ढक्कन उतारें। बोतल को दबाए रखें जब तक कि ऑटो डिस्पेंसर परीक्षण रसायन से पूरा भर न जाए और अतिरिक्त रसायन को वापस बोतल में जाने के लिए दबाव धीरे-धीरे कम करें। इन सभी तरह की मिलावटों को पकड़ने के लिए हर डेरी के पास अडल्ट्रेशन डिटेक्शन किट्स हैं। मदर डेरी के पास सबसे ज्यादा 21 किट हैं जिनसे दूध चेक किया जाता है। खासतौर से इन चार चीजों को चेक किया जाता है।

-अडल्ट्रेशन (दूध में किसी भी तरह की मिलावट)

-कम्पोजिशन (फैट आदि)

-बैक्टिरिया आदि की मौजूदगी (दूध में किसी भी तरह का इन्फेक्शन)

-कंटैमिनेशन (खराबी)

मिलावट जांचने की किट 
दूध की क्वॉलिटी परखने के लिए सीधे मदर डेरी से ' टेस्ट किट फॉर अडल्टरेशन ' खरीदी जा सकती है। छोटी किट 150 रुपये की और मीडियम 750 रुपये की बिकती है। इस किट से पांच तरह के टेस्ट किए जा सकते हैं। इनमें सॉल्ट , स्टार्च , यूरिया , न्यूट्रलाइजर्स और हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसे टेस्ट शामिल हैं। यह किट मदर डेरी ने अपने कंस्यूमर्स के लिए बनवाई है। बाजार में यह किट नहीं मिलती। इसे बनाने वाली कंपनी जुपिटर से इस किट को खरीदा जा सकता है। पता है : बी-209 , नारायण इंडस्ट्रियल एरिया , फेज-वन , फोन नंबर : 011-3052-4800

दूध चेक कराने के लिए एनएबीएल (नैशनल एक्रिडिएटेड बोर्ड ऑफ लैबोरेट्रीज) की पांच लैब हैं। इसके अलावा श्रीराम लैब में भी दूध के सैंपलों की जांच की जाती है। आप चाहें तो दूध की डेरियों में जाकर भी जांच करा सकते हैं। नोएडा फेज-दो में स्थित पराग डेरी में किसी भी प्राइवेट या सहकारी डेरी के दूध की फ्री जांच की जाती है।

कहां करें शिकायत 
दूध में मिलावट की शिकायत अपने इलाके के कंस्यूमर फोरम में कर सकते हैं। इसके अलावा फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंर्डड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया में भी शिकायत कर सकते हैं। पता है: कोटला रोड , बाल भवन के नजदीक , नई दिल्ली-110002

कैसे आता है मदर डेरी का दूध आपके घर तक 
गाय-भैंसों से दूध निकलने से लेकर दुकान तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में सभी दूध डेरियों को करीब 24 घंटे का वक्त लगता है। इस दौरान दूध की पूरी क्वॉलिटी चेक की जाती है। यह है पूरी प्रक्रिया :

गांव में चिलिंग सेंटर 
हर गांव में एक मिल्क सेंटर होता है , जहां दूध इकट्ठा होता है। इन्हें चिलिंग पॉइंट्स कहते हैं। यहां दूध को चार डिग्री सें. तापमान पर ठंडा किया जाता है। इसके बाद दूध के 10 तरह के टेस्ट होते हैं। मिलावटी दूध को रिजेक्ट कर वापस कर दिया जाता है। अगर गलती से प्लांट में गलत दूध पहुंच जाए तो वहां से भी उसे वापस भेज दिया जाता है। किसानों को दूध में मौजूद फैट और एसएनएफ (सॅलिड नॉट फैट) के आधार पर ही पैसा मिलता है ,इसलिए वे ऐसी मिलावट करने से बचते हैं।

-चिलिंग सेंटर से दूध को इंसुलेटेड टैंकरों के जरिए प्लांट पर लाया जाता है।

चिंलिंग सेंटर से प्लांट 
प्लांट में दूध की हाथ से छुए बगैर हाईटेक तरीके से प्रोसेसिंग की जाती है।

-दूध की प्रोसेसिंग के दौरान 72 डिग्री से. तापमान पर पाश्चुराइज (उबाल) कर बैक्टिरिया को नष्ट किया जाता है। फिर इसे 4 डिग्री से. तापमान पर ठंडा किया जाता है।

-इस दौरान दूध में किसी भी तरह की मिलावट की जांच की जाती है।

-प्रोसेसिंग के बाद दूध में मौजूद फैट और एसएनएफ को अच्छी तरह मिला दिया जाता है। इसी लेवल पर इस मात्रा को घटा-बढ़ाकर टोंड , फुल क्रीम , डबल टोंड आदि बनाया जाता है।

-इसके बाद दूध के 21 तरह के क्वॉलिटी टेस्ट होते हैं और फिर इसे सप्लाई कर दिया जाता है।

प्लांट से बूथों तक 
प्लांट से दूध को चार डिग्री से. तापमान पर टैंकरों में भरा जाता है और बूथों तक भेज दिया जाता है। दूध के टैंकर इंसुलेटेड (थमोर्फ्लास्क की तरह) होते हैं जिससे दूध 4-5 डिग्री से. तापमान पर ठंडा बना रहता है। एक टैंकर 8-9 हजार लीटर दूध ले जाता है।

-ले जाते वक्त ड्राइवर के सामने दूध में मौजूद फैट और एसएनएफ की मात्रा चेक कराई जाती है। यही मात्रा खुले बूथ पर भी चेक करानी पड़ती है।

-ड्राइवर जो दूध लेकर जाता है , उसमें से सैंपल चेक करने के लिए प्लांट में 100 लीटर दूध वापस लाना होता है। इस दूध की चेकिंग की जाती है।

-अगर ड्राइवर गड़बड़ी करता हुआ पकड़ा जाता है तो सभी बूथों की सैंपलिंग होती है।

-गड़बड़ी पाए जाने पर दूध को रिजेक्ट कर दिया जाता है।

-मदर डेरी के दूध के टैंकर जीपीआरएस और वायरलैस सिस्टम से लैस हैं। इससे ड्राइवर अगर गैरजरूरी काम से रुकता है तो उससे पूछताछ की जाती है।

बूथ से दुकान तक 
मिल्क बूथ में इसे 5 डिग्री के आसपास इंसुलेटेड (थर्मोफ्लास्क) टैंक में भरवा दिया जाता है।

-मदर डेरी में क्वॉलिटी अश्योरेंस के कर्मचारी बूथों की निगरानी रखते हैं।

-मदर डेरी के मिल्क बूथों को चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ आर्मी के रिटायर्ड कर्मियों को ही दी जाती है।

-गड़बड़ी पाए जाने पर बूथ वाले को हटाकर अग्रिमेंट खत्म कर दिया जाता है।

-मिल्क बूथ वालों को मदर डेरी की तरफ से सख्त हिदायत है कि अगर खुला दूध 8 डिग्री तापमान तक पहुंच जाए तो इसे फिर से प्लांट भेजकर ठंडा करवाकर ही बेचा जाए।

-पॉलिपैक दूध को रेफ्रिजरेटेड मिल्क वैन से दुकानदारों तक भेजा जाता है।

-उपभोक्ता संस्था कंस्यूमर वॉइस का कहना है कि मदर डेरी समेत तममा डेरियां इस बात का ख्याल नहीं रखतीं कि दुकानदार जरूरी तापमान पर दूध को स्टोर करके बेचता है या नहीं। कंस्यूमर वॉइस ने पिछले साल नवंबर में दूध के पैकेटों का माइक्रोबायॉलजिकल टेस्ट किया था जिसमें बताया था कि जिस ताप पर दूध डेरी से निकलता है ,ग्राहक तक पहुंचते-पहुंचते उसका पाश्चराइजेशन खराब हो जाता है। इससे दूध खराब होने की आशंका रहती है।

हमारी राय 
अगर आप बाजार से खुला दूध लेते हैं या घर पर गाय या भैंस का दूध मंगाते हैं तो खतरा यह है कि दूध गलत हो। क्या पता गंदा पानी मिलाया गया हो। क्या पता दूध नकली हो जो अरारोट , यूरिया आदि खतरनाक चीजों से बना हो। अगर गाय या भैंस का दूध आंखों के सामने निकाला गया हो तो फिर ठीक है। अगर यह मुमकिन नहीं है तो फिर मदर डेरी और अमूल जैसी कंपनियों का पैकेट वाला दूध बेस्ट है। सबसे अच्छा यह है कि खुला दूध इधर-उधर से खरीदने से बचें। किसी ब्रैंडेड कंपनी का पैक्ड दूध ही खरीदें और इसे किसी परिचित जगह या दुकान से ही लें।

ज्यादा डरने की बात नहीं 

सर्वे में ब्रैंडेड दूध बहुत कम था मदर डेरी 

- एफएसएसआई ने दूध के जो 71 सैंपल दिल्ली से लिए , उनमें से सिर्फ पांच सैंपल ब्रैंडेड कंपनियों के थे। बाकीसैंपल खुले दूध के थे। इसका मतलब यह है कि दिल्ली में जो खुला दूध बिक रहा है , उसमें ही गड़बड़ी की ज्यादासंभावना है। मदर डेरी एफएसए ( फूड सेफ्टी एक्ट ) के नियमों को पूरी तरह फॉलो करती है।

- मदर डेरी के सभी प्लांटों को 2008 से लगातार आईएसओ 22000 सर्टिफिकेट मिला है। इससे पहले आईएसओ9001 सर्टिफिकेट मिला था। साथ ही एचएसीसीपी ( हजार्ड अनालिसिस क्रिटिकल कंट्रोल पॉइंट ) सर्टिफिकेट भीहासिल है। यह फूड सेफ्टी के लिए बहुत जरूरी है।

सेफ है दिल्ली का दूध : FSSAI 
फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंर्डड्स ऑफ इंडिया ( एफएसएसएआई ) द्वारा जून से अक्टूबर - नवंबर 2011 के बीच देश भर मेंकिए गए नैशनल मिल्क सर्वे में सभी तरह के दूध के सैंपल लिए गए थे। इन नमूनों में पैक्ड - अनपैक्ड , ब्रैंडेड -नॉनब्रैंडेड सभी तरह का दूध था। एनएबीएल और कुछ प्राइवेट लैबों में इन सैंपलों की जांच कराई गई थी। चारराज्यों बिहार , झारखंड , उड़ीसा और पश्चिमी बंगाल में डिटर्जेंट सबसे ज्यादा मिला। इसका कारण कुछ भी होसकता है। हो सकता है , बर्तन वगैरह में साबुन से धोए जाने की वजह से डिटर्जेंट रह गया हो।

बाकी राज्यों के दूध सैंपलों में पानी की मात्रा और मिल्क पाउडर की मात्रा भी पाई गई। यह कोई बड़ी मिलावटनहीं है। इतना जरूर है कि डेरी कंपनियां अगर दूध में एसएमपी ( स्किम्ड मिल्क पाउडर ) मिलाती हैं तो उन्हेंपैकेट पर लिख देना चाहिए। दिल्ली के दूध को भी हम मिलावटी दूध नहीं कह सकते क्योंकि यहां भी कोई केमिकलनहीं पाया गया। हां , थोड़ी पानी वगैरह की मिलावट मिली , इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि दिल्ली में बिकरहा दूध सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। अगर आप पानी मिला या मिल्क पाउडर वाला दूध पीएंगे तो आपकोऐसे दूध में जरूरी प्रोटीन , कैल्शियम , विटामिन और दूसरे तमाम मिनरल नहीं मिलेंगे।

रिपोर्ट के बाद बैकफुट पर FSSAI: CSE 
सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट ( सीएसई ) का कहना है कि एफएसएसएआई ने जो सर्वे किया , वह बहुतहड़बड़ी में किया। दूध में पहले तो यूरिया , हाइड्रोजन परॉक्साइड , डिटर्जेंट वगैरह की मिलावट की बात कही गई।फिर उसे यह कहकर दबा दिया गया कि दूध में सिर्फ स्किम्ड मिल्क पाउडर और पानी की मिलावट है। पूछने परसिर्फ इतना बताया गया कि दूध में 14 फीसदी डिटर्जेंट मिला था। साथ ही एफएसएसएआई ने यह भी नहीं बतायाहै कि दूध में केमिकल्स की कितने पर्सेंट मिलावट की गई है और इन्हें कितने सैंपलों में पकड़ा गया। जो भी हो , यहसब है तो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक ही , इसलिए यह पता नहीं लग पा रहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणमंत्रालय की संस्था ने इस रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं किया। लगता है , रिपोर्ट पेश करने के बाद एफएसएसएआईबैकफुट पर आ गई है। बताया जाता है कि अभी तक रिपोर्ट की एक ही कॉपी है , वह भी सरकार के सामने पेश कीगई है। एफएसएसएआई की साइट पर भी कोई जानकारी नहीं है। इससे तो यही लगता है कि रिपोर्ट पेश करने केबाद यह संस्था बैकफुट पर है।

इसे मिलावट नहीं कहेंगे सरकार 
दिल्ली सरकार के फूड सेफ्टी कमिश्नर संजय कुमार सक्सेना के मुताबिक , एफएसएसएआई ने जो सर्वे किया था ,उसमें दिल्ली के 71 में से 50 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतर पाए , क्योंकि उनमें स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाथा। उनके पाउच पर इसकी सूचना नहीं थी। इनमें से कोई भी सैंपल सब - स्टैंडर्ड नहीं कहा जा सकता। इसे हममिलावट नहीं कहेंगे। जब कोई मिलावटी दूध का सैंपल ही नहीं मिला तो हम डेरियों से क्या कह सकते हैं। हमनेदूध सैंपलों में स्किम्ड मिल्क पाउडर मिले होने संबंधी रिपोर्ट तो सरकार को पहले ही दे दी थी। सरकार ने अबजरूरी दिशा - निर्देश भी डेरियों को जारी कर दिए हैं।

एफएसएसएआई महीने में कई बार दूध के सैंपल उठाता रहता है , लेकिन आज तक उसमें किसी तरह की मिलावटकी बात सामने नहीं आई। वैसे भी दिल्ली में 95 फीसदी दूध मदर डेरी , अमूल डेरी और डीएमएस सप्लाई करतीहैं। दूध के 8-10 तरह के सेफ्टी चेक भी स्टैंडर्ड लैब्स में होते हैं जैसे फैट , एसएनएफ , एसएमपी के टेस्ट। हमेंलोगों को मिलावटी दूध के बारे में जागरूक करने की जरूरत ही नहीं पड़ी क्योंकि दिल्ली में सप्लाई किए जा रहेदूध की क्वॉलिटी ठीक है।

मिलावटी दूध पकड़ना आसान : NDRI 
नैशनल डेरी रिसर्च इंस्टिट्यूट , करनाल के डायरेक्टर ए . के . श्रीवास्तव बताते हैं कि एफएसएसएआई ने दूध मेंजिन चीजों के मिले होने की बात कही है , उनमें हानिकारक तत्व नहीं हैं। वैसे दूध में जो भी मिलावट की जाती है, उसमें यूरिया , फॉर्मेलिन , डिटर्जेंट , हाइड्रोजन परॉक्साइड , नमक , जानवरों की चर्बी , वेजिटेबल ऑयल्सजैसी खतरनाक चीजें भी शामिल हैं। सचाई यह है कि इस तरह की किसी भी मिलावट को पकड़ना कोई मुश्किलकाम नहीं है। इसके लिए 8-10 तरह के अडल्टरेशन डिटेक्शन किट होते हैं , जिनके जरिए मिल्क डेरी की लैब्स मेंइस तरह के मिलावटी दूध को पकड़ा जा सकता है , लेकिन हां , आम आदमी इस तरह के टेस्ट को घरों पर नहींकर सकता , क्योंकि ऐसे टेस्टों में कई खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है , जिससे जरा भी चूक होनेपर बच्चों को नुकसान हो सकता है।

एक्सर्पट्स पैनल 
- ए . के . श्रीवास्तव , डायरेक्टर , नैशनल डेरी रिसर्च इंस्टिट्यूट , करनाल

- सैवी सौम्या मिश्रा , डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर , सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट

- संजय कुमार सक्सेना , फूड सेफ्टी कमिश्नर , दिल्ली सरकार

- असीम चौधरी , डायरेक्टर , फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंर्डड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया

- डॉ . ( प्रो .) एस . वी . मधु , एचओडी , मेडिसिन्स , जीटीबी अस्पताल

- डॉ . प्रभाकर कनेडे , चीफ , रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट , मदर डेरी , पटपड़गंज

- आर . एस . सोढी , एमडी , अमूल मिल्क , गुजरात

- एन . के . विश्वास , सीईओ , पारस मिल्क , दिल्ली

- विनोद कुमार वर्मा , इंचार्ज , पराग डेरी , नोएडा

- शिशिर घोष , कॉरपोरेट हेड , कंस्यूमर वॉइ

Tuesday, January 17, 2012

Who Has No Fingerprints ?







How is it that the fingerprints of children disappear in 24 hours while those of adults remain for longer periods?
* How do we leave traces of ourselves everywhere we touch with hardly visible fingerprints?
* Methods used for fingerprint identification…
* The signature we always carry with us: Our fingerprints…


A little girl in the US was kidnapped in 1993. Finding an opportune moment to escape, the child fled to a nearby neighborhood. Based on the girl's statement, the police arrested a suspect, who told them about the other perpetrators and the car used for the abduction.

Realizing that there was missing evidence, the defendants asked for evidence of the child's fingerprints from the car, as she had testified that she was in the automobile for hours. Strangely enough, despite scanning the entire vehicle, the detectives only found the fingerprints of the defendants. The joy of the latter made the child and her parents afraid that they would be unable to prove her presence in the car.

Leaving the rest of the story to the end, we will now focus on the fingerprint screening process, which sheds light on the frustration of the criminal detectives who were unable to find the child's fingerprints in the car.

Innately found in the DNA structure of each and every individual, fingerprints are actually formed in the early embryonic stage with the infinite knowledge and might of the Creator. No two fingerprints have ever been found to be identical in every detail, despite billions of comparisons. This miracle alludes to the omnipotence and omniscience of God. Fingerprints are never exactly alike, but unique for each individual, except identical twins. To achieve this requires the infinite knowledge of the One Who distinguishes the fingerprints of all the living and dead, as well as those who are to be born. The fingerprints of identical twins are identical because the same egg has been inseminated by the same sperm and has then split into two, and thus the two babies have exactly the same DNA structure.

As is well-known, fingerprint identification stands head and shoulders above all other human identification procedures as the most reliable means of identifying individuals worldwide. The Qur'an speaks of the revival of every human being in all their particularities down to their fingertips, thus drawing our attention to the uniqueness and distinctive features of the fingertips of each and every individual. Only if one perceives the Qur'an as being the Word of God can they avoid the great difficulty inherent in attempting to explain how the Qur'an is able to refer to this issue; at the time of the revelation, 14 centuries ago, this matter was not known, rather, it only became known in modern times:

Does the human think that We will never assemble his bones (to resurrect him)? Yes indeed, We are able to make complete his very fingertips. (Qiyamah 75:3-4) 

Fingerprints are friction whirl formations on the skin of the fingertips that are perpendicular, circular, oval, or made up of patterns parallel to each other. To make impressions of the fingerprints, the fingertips are pressed first on an ink pad, and then on a card; the ink impressions on the card retain the shape of the whirls. The fingerprints collected from items of evidence from a crime are matched (or not) with the suspect's fingerprints. The fingerprint database archived in this way is the most reliable way to conduct criminal record checks when needed.

But how are the impressions of the fingerprints retained on the objects that have been touched? Fingerprints are deposited by the natural secretions of the eccrine glands which are present in the skin of the fingertips. When we touch an object, natural sweat secretions are discharged from the glands at the fingertips and these secretions remain on the surface in the shape of the whirls.

Fingerprints of children
How is it, then, that the fingerprint impressions of the child in the story could not be found at the crime scene? 99% of the secretion produced from the glands is water. The remaining 1% is of fatty acids, ethers, amino acids, and salts. It has been found, in contrast to the fingerprints of adults, which include long carbon chains linked by ethers, that the fingerprints of children have mostly non-etherized, short chains of fatty acids. These short chains of fatty acids on the fingertips of children are volatile. Thus, the fingerprints of children evaporate in 24 hours, while those of adults remain for longer periods. For this reason, fingerprint detection should be done as soon as possible in crime scenes in which children are involved.

We normally cannot see the impression left by the whirls. Criminal detectives, however, use electronic, chemical, and physical processing techniques that permit the visualization of invisible or hidden latent print residue from natural secretions of the eccrine glands on the fingertips. They then take the photographs of the impression to compare with fingerprint impressions of suspects and those on the database.

Amazingly enough, something as simple as sweat—which we mistakenly think is composed of pure water—can be used to solve serious issues as needed, because our fingerprints, which are hardly visible, leave clear signs of our presence everywhere we touch. It is not difficult to understand, then, that nothing has been created to vanish for ever; just as we leave our fingerprints everywhere, at every moment we also leave our own images in different forms of action in the minds of others and they are recorded on the heavenly plates. By the way, if you think that the suspects in the child abduction case were able to get away with it, you are wrong! Though her fingerprints could not be found in the car, the relief of the suspects did not last long. A small fiber from her clothing was found in the car, thus proving them to be guilty.